किसी संघर्ष के मानवीय परिणाम
दक्षिणी ओसेशिया, जिसमें अधिकांश निवासी जातीय ओसेशियन हैं, जॉर्जिया से स्वतंत्र होना चाहता है। सोवियत यूनियन के विघटन के पश्चात, 1990 के दशक के आरम्भ से ही इस क्षेत्र में हिंसा और तनाव की स्थिति बनी रहती है।
इनमें से सबसे मुख्य संघर्ष वर्ष 2000 वाले दशक, विशेष रूप से 2008 में घटित हुआ जब जॉर्जियन सेनाओं और ऑसेशियन अलगाववादियों के बीच टकराव हो गया। इस टकराव ने शीघ्र ही एक छोटी अवधि के, किंतु भीषण युद्ध का आकार लिया जिसमें दोनों ओर के कई लोग हताहत हुए और हजारों नागरिकों को विस्थापित होना पड़ा।
बहुत कोशिशों के बावजूद भी 1989 से आरम्भ हुए इस जातीय राजनीतिक टकराव का समाधान नहीं खोजा जा सका।
सेना, शांति रक्षकों तथा नागरिकों के लिए आघात राहत
ऐसी पृष्ठभूमि में आर्ट ऑफ लिविंग संघर्ष की विभीषिका से आहत लोगों की सहायता के लिए आगे आया। 20 अगस्त 2008 से ही रूस से आई स्वयंसेवकों की एक टीम ने, जिसमें चिकित्सक और मनोचिकित्सक भी थे, त्स्कीनवाली में चौबीसों घंटे काम करना आरम्भ कर दिया।
आघात राहत कार्यक्रमों से, जिनमें श्वसन प्रक्रियाएँ और ध्यान था, लगभग 1,500 लोग लाभान्वित हुए। 200 से अधिक रूसी सैनिक, 80 रूसी शांति सेवक और 200 दक्षिणी ऑसेशियन शांति रक्षकों ने, जो सीधे फायरिंग लाइन में थे, इन सत्रों में भाग लिया। लगभग 1,000 नागरिकों, जिनमें डॉक्टर, अध्यापक, छात्र, पत्रकार तथा राष्ट्रपति के प्रशासनिक स्टाफ सदस्य भी थे, ने भी आर्ट ऑफ लिविंग के कार्यक्रमों का लाभ उठाया।
युद्ध के चलते भी स्वयंसेवक अपने कार्य में जुटे रहे
भीषण युद्ध के बीच, जिसमें एक ओर रूसी सैनिक तथा दक्षिणी ऑसेशियन अलगाववादी थे और दूसरी ओर जॉर्जिया के सैनिक, आर्ट ऑफ लिविंग के स्वयंसेवकों ने मोर्चे पर डटे रह कर विभिन्न विचारधाराओं के व्यक्तियों की सहायता की। उनकी दृढ़ प्रतिबद्धता की दक्षिणी ऑसेशिया के स्वास्थ्य मंत्री तथा राष्ट्रपति प्रशासन, दोनों पक्षों ने प्रशंसा और सराहना की।





